Namo Drone Didi Yojana 2026: क्या आपने कभी सोचा था कि गाँव की महिलाएं खेतों में ड्रोन (Drone) उड़ाएंगी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “नमो ड्रोन दीदी योजना” ने इसे सच कर दिखाया है।
इस योजना का उद्देश्य खेती को आधुनिक बनाना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को लाखों रुपये के ड्रोन मुफ्त (या भारी सब्सिडी पर) दे रही है और महिलाओं को इसे उड़ाने की पायलट ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैसे एक आम महिला ‘ड्रोन पायलट’ बन सकती है और इससे कमाई कैसे होती है।

नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है?
यह एक केंद्रीय योजना है जिसके तहत अगले कुछ वर्षों में 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि ड्रोन (Agricultural Drones) दिए जाएंगे।
ड्रोन का काम क्या होगा? इन ड्रोन्स का इस्तेमाल खेतों में खाद (Fertilizer) और कीटनाशक (Pesticides) छिड़कने के लिए किया जाएगा। जहाँ मजदूर घंटों में काम करते थे, यह ड्रोन मिनटों में पूरे खेत में छिड़काव कर देगा।
मुख्य विचार: “ड्रोन उड़ेगा आसमान में, खुशहाली आएगी किसान के घर में।”
योजना के जबरदस्त फायदे
यह योजना सिर्फ ड्रोन देने तक सीमित नहीं है, इसके फायदे बहुत बड़े हैं:
भारी सब्सिडी (Huge Subsidy): सरकार ड्रोन खरीदने के लिए ड्रोन की कीमत का 80% या अधिकतम ₹8 लाख तक की सब्सिडी देती है। बाकी का पैसा बैंक से सस्ते लोन (AIF) के जरिए मिल जाता है।
फ्री ट्रेनिंग (Pilot Training): चुनी गई महिलाओं को 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है (5 दिन क्लासरूम + 10 दिन फील्ड)।
कमाई का मौका: ‘ड्रोन दीदी’ किसानों के खेतों में छिड़काव करके किराया (Rent/Charge) ले सकती है। अनुमान है कि इससे महिला को हर महीने ₹10,000 से ₹15,000 की अतिरिक्त कमाई होगी।
सम्मान: गाँव में ‘पायलट’ के रूप में एक नई पहचान मिलती है।
ड्रोन पैकेज में क्या-क्या मिलता है?
सरकार सिर्फ ड्रोन नहीं देती, पूरा पैकेज देती है:
1 एग्रीकल्चर ड्रोन (छिड़काव के लिए)।
एक्स्ट्रा बैटरी और चार्जर।
टूलकिट और स्पेयर पार्ट्स।
ट्रेनिंग का पूरा खर्च।
कौन बन सकती है ड्रोन दीदी?
यह योजना व्यक्तिगत (Individual) नहीं बल्कि समूह आधारित है।
SHG सदस्यता: महिला का किसी स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ा होना अनिवार्य है।
उम्र: 18 वर्ष से ऊपर।
शिक्षा: कम से कम 10वीं पास होना चाहिए (ताकि वे ड्रोन के बेसिक फंक्शन और मोबाइल ऐप समझ सकें)।
रुचि: नई तकनीक सीखने की ललक होनी चाहिए।
आवेदन कैसे करें? (Application Process)
इस योजना का कोई “डायरेक्ट ऑनलाइन फॉर्म” नहीं है जिसे आप साइबर कैफे से भर सकें। इसकी चयन प्रक्रिया थोड़ी अलग है:
1: SHG मीटिंग
यह योजना क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) या बड़े SHG नेटवर्क के जरिए लागू होती है। आपके समूह की बैठक में इसकी चर्चा होनी चाहिए।
2: लीडर का चुनाव
समूह की महिलाएं मिलकर किसी एक या दो सदस्यों को नॉमिनेट (Nominate) करती हैं जो ट्रेनिंग के लिए जाएंगी।
3: फर्टिलाइजर कंपनियों से संपर्क
सरकार ने इफको (IFFCO) और अन्य खाद कंपनियों को जिम्मेदारी दी है। ये कंपनियां जिलों में SHGs का चयन करती हैं।
4: ट्रेनिंग सेंटर
चयनित महिलाओं को कौशल विकास केंद्र (Skill India Centers) या IFFCO के सेंटर पर ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने पर उन्हें ‘ड्रोन पायलट’ का सर्टिफिकेट और ड्रोन सौंपा जाता है।
नमो ड्रोन दीदी योजना भारत की कृषि व्यवस्था में एक क्रांति है। यह न केवल खेती को आसान बना रही है बल्कि महिलाओं को टेक्नोलॉजी से जोड़कर उन्हें सशक्त कर रही है। अगर आपका समूह (SHG) सक्रिय है, तो अपने ब्लॉक ऑफिस में जाकर इस योजना की जानकारी जरूर लें।
जरूरी बात: यह ड्रोन कोई खिलौना नहीं है, यह एक कमर्शियल मशीन है। इसलिए इसकी सुरक्षा और मरम्मत का ध्यान रखना भी जरूरी है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: ड्रोन की मरम्मत (Repair) कौन करेगा?
Ans: सरकार सिर्फ पायलट नहीं, बल्कि ड्रोन असिस्टेंट/तकनीशियन की भी ट्रेनिंग दिलवा रही है ताकि गाँव में ही छोटी-मोटी मरम्मत हो सके।
Q2: क्या मुझे अपनी जेब से पैसा लगाना होगा?
Ans: ड्रोन की कीमत काफी ज्यादा होती है (लगभग 10 लाख), लेकिन सरकार 8 लाख देती है। बाकी 2 लाख समूह के बैंक लोन से कटता है, जिसे कमाई से चुकाया जा सकता है। आपको अपनी जेब से कैश नहीं देना होता।







