
Ai news: सोशल मीडिया पर इन दिनों एआई से बने फोटो, वीडियो और आवाज़ों की बाढ़ सी आ गई है। कभी किसी नेता का फर्जी वीडियो वायरल हो जाता है तो कभी किसी आम आदमी को बदनाम करने वाली तस्वीरें सामने आ जाती हैं। इसी को लेकर अब केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती शुरू कर दी है।
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब एआई से बनी किसी भी फोटो, वीडियो, ऑडियो या ग्राफिक पर साफ तौर पर लिखा होना चाहिए कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किया गया है। यानी अब एआई कंटेंट को छुपाकर फैलाना आसान नहीं रहेगा।
एक बार लगा एआई का टैग, फिर हट नहीं पाएगा
सरकार ने यह भी कह दिया है कि अगर किसी कंटेंट पर एआई का लेबल या मेटाडाटा लगा दिया गया, तो बाद में उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकेगा। इससे फर्जी वीडियो और डीपफेक की पहचान करना आसान होगा।
गलत काम हुआ तो प्लेटफॉर्म जिम्मेदार
अगर कोई यूजर एआई का गलत इस्तेमाल कर अश्लील, गैरकानूनी, धोखाधड़ी से जुड़ा या बच्चों के यौन शोषण वाला कंटेंट बनाता या शेयर करता है, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ यूजर की नहीं बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी होगी। इसके लिए कंपनियों को ऑटोमेटेड तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
यूजर्स को बार-बार दी जाएगी चेतावनी
सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर्स को हर तीन महीने में कम से कम एक बार चेतावनी देंगे कि नियम तोड़ने पर अकाउंट बंद हो सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
अब 36 घंटे नहीं, सिर्फ 3 घंटे का समय
पहले किसी आपत्तिजनक कंटेंट की सूचना मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को कार्रवाई के लिए 36 घंटे मिलते थे, लेकिन अब सरकार ने यह समय घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया है। शिकायत मिलते ही तुरंत सूचना देना और कार्रवाई करना जरूरी होगा।
आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
सरकार का कहना है कि इन सख्त नियमों से सोशल मीडिया पर फैलने वाले फर्जी वीडियो, झूठी अफवाहों और ऑनलाइन ठगी पर काफी हद तक रोक लगेगी। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में जहां लोग आसानी से फर्जी कंटेंट पर भरोसा कर लेते हैं, वहां इसका असर ज्यादा देखने को मिलेगा।







